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जब मैं आभार व्यक्त करने के लिए लिखने बैठा और शुक्रिया अदा .... Read More
जब मैं आभार व्यक्त करने के लिए लिखने बैठा और शुक्रिया अदा करने के लिए सोचने लगा तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ से लिखूँ और कहाँ खत्म करूँ क्योंकि कोई किताब केवल शब्दों के भंडार मात्र नहीं होती है. यह लेखक का एहसास और दृष्टिकोण होते है जो उसके जीवन यात्रा तय करते समय बनता है। इसमें असंख्य किरदार और वस्तुएँ आती हैं जो उस लेखक के गढ़ती है और फिर वह लेखक उस अमुक किताब को गढ़ता है जिसमें उन सबका योगदान है। इसके बावजूद भी अगर शुरुआत करना ही है तो सबसे पहले मैं अपने माता-पिता का आभार व्यक्त करता हूँ जो मुझे इस खुबसूरत दुनिया में लाये और पाल-पोष कर पढ़ा लिखा कर इतना काबिल बनाया कि मैं कुछ लिखने की कोशिश कर सका। साथ ही मेरे परिवार के बाकि सदस्य अन्नपूर्णा दीदी, सुनीता दीदी बृजेंद्र भइया, रविंद्र सिंह, सिंह, रेखा का आभारी हूँ जो मेरी जिन्दगी अपने तरीके से तराशते रहे।
| Sr | Chapter Name | No Of Page |
|---|---|---|
| 1 | चैप्टर- 1 शुरूआती संघर्ष | 10 |
| 2 | चैप्टर -2 आई.आई.टी. में प्रवेश | 4 |
| 3 | चैप्टर-3 हॉस्टल में पहला दिन | 3 |
| 4 | चैप्टर -4 मुकेश भईया | 3 |
| 5 | चैप्टर- 5 रैगिंग चैप्टर | 15 |
| 6 | चैप्टर- 6 ओरिएंटेशन प्रोग्राम | 15 |
| 7 | चैप्टर-7 बाबूजी का भाषण | 11 |
| 8 | चैप्टर- 8 रैगिंग रिटर्न | 20 |
| 9 | चैप्टर-9 हिमांगी रैगिंग और भीम | 10 |
| 10 | चैप्टर -10 मास रैगिंग | 4 |
| 11 | चैप्टर- 11 नामकरण | 5 |
| 12 | चैप्टर- 12 प्यार उत्सव और प्रतियोगिता | 10 |
| 13 | चैप्टर -13 मजनू की चाय और चौबे जी | 4 |
| 14 | चैप्टर- 14 स्पर्धा | 18 |
| 15 | चैप्टर- 15 काशी यात्रा | 20 |
| 16 | चैप्टर- 16 B.H.U. V.T. और प्यार | 8 |
| 17 | चैप्टर -17 प्रोफेसर्स और सेमेस्टर | 13 |
| 18 | चैप्टर -18 हिमांगी रिटर्न और बिरला छात्रावास | 11 |
| 19 | चैप्टर 19 लड़कों के हॉस्टल में लड़कियों | 11 |
| 20 | चैप्टर -20 बर्थडे और जॉब | 11 |
| 21 | चैप्टर -21 अस्सी घाट और प्रेम | 9 |
| 22 | चैप्टर- 22 मेरे दोस्त नाग और जाजू | 11 |
| 23 | चैप्टर -23 सबसे खुश आदमी, धन्नू जी अखबार वाले | 6 |
| 24 | चैप्टर -24 जीवन-मृत्यु और काशी | 9 |
| 25 | चैप्टर -25 पहले साल के कुछ अतिंम दिन | 9 |