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भारतीय चित्रकला का स्वरूप आरम्भ से ही अध्यात्म एवं धर्म से संबंधित रहा है। जिसका विधान पूर्णत: सैद्धान्तिक रहा है। साथ ही उसके व्यवस्थित एवं निश्चित स्वरूप के निरूपण में क्रमबद्ध सिद्धान्तोें की दार्शनिक एवं व्यवहारिक प्रक्रिया भी दिखायी देती है।
| Sr | Chapter Name | No Of Page |
|---|---|---|
| 1 | अध्याय 1 कला एवं सौन्दर्य | 10 |
| 2 | अध्याय 2 पाश्चात्य कला में सौन्दर्य संबंधी अवधारणा | 13 |
| 3 | अध्याय 3 जर्मन सौन्दर्यशास्त्र | 11 |
| 4 | अध्याय 4 कला में संचारण | 9 |
| 5 | अध्याय 5 भारतीय कला में सौन्दर्य संबंधी विचारधारा | 8 |
| 6 | अध्याय 6 भारतीय रस सिद्धान्त | 20 |
| 7 | अध्याय 7 सौन्दर्य सिद्धान्त संबंधी अन्य महत्वपूर्ण विचार | 7 |
| 8 | अध्याय 8 अलंकार | 7 |