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भारतीय विश्वविद्यालयों के मॉडल पाठ्यक्रम के लिए नवीनतम् यू0जी0सी0 दिशानिर्देशों के अनुसार ‘आवृतबीजियों की विविधता: सुव्यवस्थित वर्गीकरण विज्ञान, वृद्धि एवं प्रजनन (Diversity of Angiospherms : Systematics, Development and Reproduction)* पर यह पुस्तक सरल, ग्राह्य और समझने योग्य भाषा में लिखी गई है। यह पुस्तक अत्यधिक विवरणात्मक है जिसमें भरपूर स्व-व्याख्यात्मक चिन्हित आरेख हैं जो बी0एस-सी0 द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के साथ-साथ उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी है। इस पुस्तक की विशेषता प्रश्नों की तीन श्रेणियॉ (दीर्घउत्तरीय प्रश्न, लघुउत्तरीय प्रश्न, अति लघुउत्तरीय प्रश्न) हैं जिन्हें प्रत्येक अध्याय के अन्त में उनके उत्तरों सहित दिया गया है।
| Sr | Chapter Name | No Of Page |
|---|---|---|
| 1 | इकाई—१, अध्याय १ : वगीकरण के सिद्धान्त, | 4 |
| 2 | अध्याय २ : पादप नामकरण की अंतर्राष्ट्रीय संहिता का संक्षिप्त परिचय | 5 |
| 3 | अध्याय ३ : पादप वर्गीकरण की विभिन्न पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन | 14 |
| 4 | अध्याय ४ : हरबेरिम: संकल्पना, तकनीक तथा उपयोग | 7 |
| 5 | अध्याय ५ : महत्वपूर्ण वानस्पतिक उद्यान | 6 |
| 6 | इकाई—२, अध्याय ६ : आवृतबीजी वर्गिकीय वनस्पति की परिभाषिक शब्दावली | 38 |
| 7 | अध्याय ७ : कुछ आवृतबीजी कुलों का वर्गीकृत अध्ययन | 158 |
| 8 | इकाई—३, अध्याय ८ : कायिक एवं पुष्पीय भागों की बाह्य आकारिकी | 18 |
| 9 | अध्याय ९ : रूपान्तरण : पर्णाभवृन्त, प्रर्णाभ पर्व तथा प्रर्णाभ स्तम्भ | 13 |
| 10 | अध्याय १० : विभज्योतक : प्रकार, | 9 |
| 11 | अध्याय ११ : ऊतक तंत्र का अध्ययन : स्थायी ऊतक | 18 |
| 12 | अध्याय १२ : ऊत्तक तत्रों का अध्ययन: बाह्यत्वचीय, भरण तथा सवंहन ऊतक तंत्र, | 13 |
| 13 | अध्याय १३ : जड़ों तनों तथा पत्तियों की आन्तरिक संरचना, | 15 |
| 14 | अध्याय १४ : वैâम्बियम : इसके कार्य, | 5 |
| 15 | अध्याय १५ : वैâम्बियम : इसकी जड़ों तथा तनों में असंगति | 28 |
| 16 | अध्याय १६ : जड़ तना अवस्थांतर | 5 |
| 17 | इकाई—४, अध्याय १७ : नर युग्मकोद्भिद की संरचना तथा विकास: लघुबीजाणुजनन तथा लघुयुग्मकजनन | 11 |
| 18 | अध्याय १८ : मादा युग्मकोद्भिद : गुरुबीजाणुजनन तथा गुरुयुग्मकजनन, भ्रूण-कोष के प्रकार, | 20 |
| 19 | अध्याय १९ : निषेचन : द्विनिषेचन | 7 |
| 20 | अध्याय २० : भ्रूण का विकास अथवा भू्रणोद्भव, | 7 |
| 21 | अध्याय २१ : भू्रणपोष का विकास तथा इसकी आकारिकी प्रकृति, | 6 |
| 22 | अध्याय २२ : असंगजनन तथा बहुभू्रणीयत | 6 |