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पंडित गोकुलचन्द जी शर्मा इस क्षेत्र के चिरप्रसिद्ध कवि ह .... Read More
पंडित गोकुलचन्द जी शर्मा इस क्षेत्र के चिरप्रसिद्ध कवि हैं । उनका सारा जीवन काव्य साधना में ही बीता है। उनकी साधना भी सही अर्थों में साधना रही हैन उन्होंने अपना अथवा अपनी कला का कभी प्रचार किया और न इस मार्ग से वे तिल भी हटे । बड़े गौरव और अभिमान के साथ उन्होंने हिन्दी मां की प्राराधना की है। जिस तन्मयता और लगन से उन्होंने स्वयं कला- पाधना की उसी प्रकार दूसरों को भी इस कार्य में लगाया। वे कवि और अध्यापक यथार्थतः बराबर बने रहेयही कारण है कि इस क्षेत्र में उनके विद्या एवं कला के शिष्यों की संख्या बहुत बड़ी हुई है। अलीगढ़ जिला तो एक प्रकार से उनका दीक्षित शिष्य सा है ।
| Sr | Chapter Name | No Of Page |
|---|---|---|
| 1 | खंड -1, क- श्रद्धांजलि | 7 |
| 2 | ख- शुभकामनाये | 5 |
| 3 | ग –जीवनी | 10 |
| 4 | घ – संस्कारन | 1 |
| 5 | ड –समीक्षांजलि | 63 |
| 6 | खंड -2, काव्य कुंज | 63 |